Yearly Archives: 2016

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सत्य वचन

December 30th, 2016|चुटकुले|

अगर सुबह जल्दी उठने से ताक़त, बुद्धि और धन बढ़ता तो पेपर वाला, दूध वाला और नगर निगम के झाडू मारने वाले सबसे ज्यादा अमीर होते... सोते रहें और जीवन का आनंद लें... लोग ऐसे ही भडकाते रहते हैं

असली पहलवान

December 30th, 2016|चुटकुले|

संता (पहलवान से) - "तुम एक बार में कितने आदमियों को उठा सकते हो ??" ? . पहलवान  - "5 को" . संता - "बस..! तुमसे अच्छा तो मेरा मुर्गा है, जो सुबह पुरे मोहल्ले को उठा देता है"..????

ज्ञानी पुरूष

December 30th, 2016|चुटकुले|

पप्पु अपने ससुराल में गुरुजी का प्रवचन सुनने गया ! गुरुजी बोले, "जो-जो स्वर्ग जाना चाहता है, वह अपना हाथ ऊपर करे"! पप्पु की बीवी और सास ने हाथ ऊपर उठाया ! गुरूजी ने पप्पु जी से पूछा, "क्या तुम स्वर्ग नहीं जाना चाहते?" पप्पु,"गुरुजी, यह दोनों चली जायेंगी तो यही पर स्वर्ग हो जायेगा..." [...]

अपनी उजड़ी हुई दुनिया की कहानी हूँ मैं

December 27th, 2016|शाएरी|

अपनी उजड़ी हुई दुनिया की कहानी हूँ मैं एक बिगड़ी हुई तस्वीर-ए-जवानी हूँ मैं आग बन कर जो कभी दिल में निहाँ रहता था आज दुनिया में उसी ग़म की निशानी हूँ मैं हाए क्या क़हर है मरहूम जवानी की याद दिल से कहती है कि ख़ंजर की रवानी हूँ मैं आलम-अफ़रोज़ तपिश तेरे लिए [...]

अपने पहलू से वो ग़ैरों को उठा ही न सके

December 27th, 2016|शाएरी|

अपने पहलू से वो ग़ैरों को उठा ही न सके उन को हम क़िस्सा-ए-ग़म अपना सुना ही न सके ज़ेहन मेरा वो क़यामत कि दो-आलम पे मुहीत आप ऐसे कि मिरे ज़ेहन में आ ही न सके देख लेते जो उन्हें तो मुझे रखते म'अज़ूर शैख़-साहिब मगर उस बज़्म में जा ही न सके अक़्ल [...]

सिर दर्द की गोली

December 27th, 2016|चुटकुले|

हमारे एडमिन पेड़ पर उल्टे लटके हुए थे. मैने पूछा – क्या हो गया एडमिन साहब? वे बोले – कुछ नहीं, सिर दर्द की गोली खाई है, कहीं पेट में ना चली जाए.!!! ?

संतरों का बँटवारा

December 26th, 2016|चुटकुले|

दो बच्चे रात को एक दुकान से संतरों की टोकरी चुराकर लाए और सोचा कि इनका बंटवारा कर लेते हैं । एक ने कहा कि चलो कब्रिस्तान में चलकर बंटवारा कर लेते हैं । तब वो दोनों कब्रिस्तान के दरवाजे को फांदकर अंदर जाते हैं , उसी समय दो संतरे टोकरी में से गिर जाते [...]

मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरी महबूब न माँग

December 26th, 2016|शाएरी|

मैंने समझा था कि तू है तो दरख़्शाँ है हयात तेरा ग़म है तो ग़मे-दहर का झगड़ा क्या है तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है? तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए यूँ न था, मैंने फ़क़त चाहा था यूँ हो [...]

बड़े घर की बेटी

December 25th, 2016|लघु कथाएँ|

बेनीमाधव सिंह गौरीपुर गाँव के जमींदार और नम्बरदार थे। उनके पितामह किसी समय बड़े धन-धान्य संपन्न थे। गाँव का पक्का तालाब और मंदिर जिनकी अब मरम्मत भी मुश्किल थी, उन्हीं की कीर्ति-स्तंभ थे। कहते हैं, इस दरवाजे पर हाथी झूमता था, अब उसकी जगह एक बूढ़ी भैंस थी, जिसके शरीर में अस्थि-पंजर के सिवा और [...]

नमक का दारोगा

December 25th, 2016|लघु कथाएँ|

जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौ-बारह थे। पटवारीगिरी का सर्वसम्मानित पद छोड-छोडकर लोग इस विभाग की बरकंदाजी करते थे। [...]