मेरे आवास के ठीक सट कर बनी मस्ज़िद

March 23rd, 2017|लेख|

एक हिन्दू ब्राह्मण परिवार का होकर भी मेरे मन में कभी ये खयाल नही आया की ऐसा क्यूँ है? इस मस्ज़िद में इबादत के लिए आने वाले हर व्यक्ति से दुआ सलाम होता है। नतीजा वो शख्स शहर के किसी भी कोने में बाज़ारो में जब वापस नज़र आता तो एक तरह [...]