शाएरी

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अपनी उजड़ी हुई दुनिया की कहानी हूँ मैं

December 27th, 2016|शाएरी|

अपनी उजड़ी हुई दुनिया की कहानी हूँ मैं एक बिगड़ी हुई तस्वीर-ए-जवानी हूँ मैं आग बन कर जो कभी दिल में निहाँ रहता था आज दुनिया में उसी ग़म की निशानी हूँ मैं हाए क्या क़हर है मरहूम जवानी की याद दिल से कहती है कि ख़ंजर की रवानी हूँ मैं आलम-अफ़रोज़ तपिश तेरे लिए [...]

अपने पहलू से वो ग़ैरों को उठा ही न सके

December 27th, 2016|शाएरी|

अपने पहलू से वो ग़ैरों को उठा ही न सके उन को हम क़िस्सा-ए-ग़म अपना सुना ही न सके ज़ेहन मेरा वो क़यामत कि दो-आलम पे मुहीत आप ऐसे कि मिरे ज़ेहन में आ ही न सके देख लेते जो उन्हें तो मुझे रखते म'अज़ूर शैख़-साहिब मगर उस बज़्म में जा ही न सके अक़्ल [...]

मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरी महबूब न माँग

December 26th, 2016|शाएरी|

मैंने समझा था कि तू है तो दरख़्शाँ है हयात तेरा ग़म है तो ग़मे-दहर का झगड़ा क्या है तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है? तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए यूँ न था, मैंने फ़क़त चाहा था यूँ हो [...]