दरियाबाद विधानसभा के दरियाबाद ब्लॉक में बिजली कटौती सबसे बड़ी समस्या है। अघोषित बिजली कटौती और जर्जर लाइनों के कारण उपभोक्ता आए दिन जूझते हैं। खुले में रखें ट्रांसफार्मर कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में खेतों से गुजरे जर्जर तार समस्या बने है।

दरियाबाद को आपूर्ति के लिए अब तक एक भी उपकेंद्र बनकर नहीं मिल सका। दरियाबाद के 161 गांवों को आपूर्ति एक ही उपकेंद्र से दी जा रही है। शासन स्तर पर कहने को यहां 18 घंटे आपूर्ति होनी चाहिए। लेकिन कभी छह से सात घंटे तो कभी महज पांच घंटे में ग्रामीणों को संतोष करना पड़ता है। अधिसंख्य गांवों को तीन दशक पुरानी बिजली लाइनों से ही आपूर्ति हो रही है, जिन गांवों में पुरानी लाइनों से आपूर्ति हो रही है। वहां अक्सर ओवरलोड के कारण तार गर्म होकर टूट जाते हैं। गत माह बहरौली में तार टूटने से घरों में करेंट उतरा था, जिससे आधा दर्जन लोग झुलसे थे। 60 घरों की बत्ती हफ्तों गुल रही।

टिकैतनगर उपकेंद्र से हो रही सप्लाई : बनगांवा में बने 33 केवीए के टिकैतनगर विद्युत उपकेंद्र से 65सौ कनेक्शन धारकों को आपूर्ति दी जा रही। इसमें दरियाबाद क्षेत्र के भी उपभोक्ता शामिल हैं। कनेक्शन के आकंड़े से ही ओवरलो¨डग और आपूर्ति की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है।

कहीं बिजलीकरण नहीं, तो कहीं कनेक्शन: पावर कॉर्पोरेशन दरियाबाद ब्लाक के 161 गांवों में बिजलीकरण के दावे करता है। लेकिन हकीकत यह है कि भगवानपुर सहित कई गांवों में बिजलीकरण नहीं है। वहीं भरतपुर में बिजलीकरण के बाद कनेक्शन नहीं दिया जा सका है।

खुले में जमीन पर रखे ट्रांसफार्मर: दरियाबाद नगर, अलियाबाद चौराहे, थाने के निकट सहित अधिकांश जगहों पर ट्रांसफार्मर खुले में जमीन पर रखें हैं। खुले में ट्रांसफार्मर रखें होने से कभी भी हादसे की आशंका रहती है।

फुंके ट्रांसफार्मर बदलने में लगते महीनों: सरकार का आदेश था कि फुंके ट्रांसफार्मर 72 घंटे के भीतर बदले जाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दरियाबाद के अमनियापुर गांव में एक माह बाद ट्रांसफार्मर बदला गया। सेखवापुर मजरे उफरौली व बहरौली में भी ट्रांसफार्मर को बदला नहीं जा सका।